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कथित 108 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सौरभ शर्मा को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है। हालांकि अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जमानत का अर्थ दोषमुक्ति नहीं है।
भोपाल। कथित 108 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति वाले मामले में RTO के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है। खबर यह भी है कि जबलपुर हाई कोर्ट ने उन्हें 10 लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दे दिया है, लेकिन अदालत ने अपने फैसले में ये साफ कर दिया कि जमानत देना , किसी प्रकार से अंतिम गुण-दोष पर कोई राय मानो तय नहीं करता है।
जबलपुर हाई कोर्ट की जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद कहा कि नियमित जमानत सिर्फ कानूनी प्रक्रिया और वर्तमान हालात को देखते हुए दी जाती है। अदालत ने ये भी जोड़ दिया कि इस आदेश को आरोपी के पक्ष में या विरोध में अंतिम टिप्पणी नहीं समझा जाए। साथ ही, ट्रायल कोर्ट में मामला कानून के मुताबिक चलता रहेगा और आख़िरी फैसला , तमाम साक्ष्य और दलीलों पर आधारित होगा।
कोर्ट ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है, और आरोप भी तय कर दिए गए हैं। इसके साथ ही अदालत ने ये भी देखा कि ट्रायल फिलहाल इतनी जल्दी खत्म होने का संकेत नहीं देता, ऐसे में नियमित जमानत देना उचित रहेगा। इन्हीं परिस्थितियों के सहारे सौरभ शर्मा को राहत दी गई।
इससे पहले सौरभ शर्मा की नियमित जमानत वाली याचिकाएं जिला अदालत और हाई कोर्ट दोनों जगह खारिज कर दी गई थीं। उन्होंने पत्नी की बीमारी का हवाला देकर अंतरिम जमानत भी मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने उस अनुरोध को भी स्वीकार नहीं किया। अब, जांच पूरी होने के बाद हाई कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है।
सौरभ शर्मा का यह मामला तब सुर्खियों में आया जब जांच एजेंसियों ने कार्रवाई के दौरान उनके पास करीब 52 किलोग्राम सोना और करीब 11 करोड़ रुपये नकद मिलने का दावा किया था। इसके बाद मामला कथित 108 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति से जुड़ गया, और फिर यह मध्य प्रदेश के सबसे ज्यादा चर्चित मामलों में शुमार होने लगा।
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