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JPSC भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी CBI-ED जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट, TDPL को ब्लैकलिस्ट करने और भविष्य की परीक्षाएं TCS जैसी विश्वसनीय एजेंसी से कराने की मांग पर अड़े हैं। सरकार से वार्ता की तैयारी के बीच आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा।
रांची। झारखंड में JPSC भर्ती परीक्षा वाले विवाद को लेकर, छात्रों का आंदोलन यूँ ही चल रहा है लगातार। आज भी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरने पर बैठे अभ्यर्थी लोग, सरकार से बात करने को तैयार तो हैं… पर उन्होंने ये भी साफ, बता दिया है कि जब तक उनकी मुख्य मांगों पर ठोस काम नहीं होगा , तब तक यह आंदोलन नहीं रुकेगा। छात्रों की मांग में ये सब शामिल है कि पूरे प्रकरण की पड़ताल CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए, आगे की भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाया जाए ,और जिन पर शक है उन पर सख्त कार्रवाई हो, बस यही।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने कई अहम बाते रखी हैं। उनका कहना है कि 14वीं JPSC परीक्षा की जांच CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों से करवाई जाए। साथ ही मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया जाए , ताकि फैसला जल्द आ सके। छात्रों ने टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा कराई गई परीक्षाओं को रद्द करने और उस कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग भी उठाई है। आगे की परीक्षाओं के लिए किसी भरोसेमंद एजेंसी, जैसे TCS को जिम्मा देने की बात भी वे लगातार बोल रहे हैं।
आंदोलनकारी छात्र सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन दो शर्तों पर अड़ गए हैं। पहली शर्त ये कि वार्ता सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ हो। दूसरी, बैठक के दौरान कम से कम दो मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहें, ताकि पूरी प्रक्रिया कुछ ज्यादा खुली और पारदर्शी बनी रहे। छात्र नेताओं का कहना है कि ये आंदोलन पूरे राज्य के अभ्यर्थियों का है, इसलिए चर्चा भी खुली और निष्पक्ष होनी चाहिए, नहीं तो बात अधूरी रहेगी।
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना 13वें दिन भी चलता रहा। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत, कुल छह छात्र आमरण अनशन पर बैठे बताए जा रहे हैं। इस बीच CID ने मामले में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद अब कुल गिरफ्तारी 19 हो गई है। मगर छात्र कह रहे हैं कि सिर्फ CID जांच से उन्हें संतोष नहीं, और इसलिए केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग पर वे कायम रहेंगे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से बात के लिए चार मंत्रियों की समिति बनाई है, और सरकार की तरफ से बातचीत की पहल भी की जा रही है। पर अभी तक छात्रों और सरकार के बीच कोई अंतिम सहमति बन नहीं पाई है। प्रदर्शनकारी लोग पहले से ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन और आमरण अनशन चलता रहेगा।
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