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नर्मदा के पावन तट पर मांधाता पर्वत आज वैदिक ऋचाओं से गूंज उठा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्नी संग 45 पवित्र शिलाओं की पूजा कर पंचायतन मंदिर का शुभारंभ किया।

सुबह की पहली किरण के साथ ही ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर स्थित एकात्म धाम का प्रांगण शंखनाद और डमरू की ध्वनि से गूंज उठा। मौका था आदिगुरु शंकराचार्य की तपोभूमि पर एक भव्य पंचायतन मंदिर के निर्माण शुभारंभ का। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी धर्मपत्नी के साथ इस दिव्य आयोजन में पहुंचे। उन्होंने धधकते हवन कुंड के सामने बैठकर पूज्य संतों के साथ विधिवत आहुतियां समर्पित कीं और 45 पावन शिलाओं का चंदन-वंदन कर मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी।
जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, एकात्म धाम में संतों और धर्माचार्यों के मुख से निकले वैदिक श्लोकों ने पूरे वातावरण को अलौकिक बना दिया। मुख्यमंत्री ने हाथ जोड़कर प्रदेशवासियों के मंगल, शांति और समृद्धि की कामना की। वहां मौजूद हर श्रद्धालु इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण का साक्षी बनने के लिए लालायित दिखा।
इस आध्यात्मिक यात्रा में शासन और प्रशासन का सुंदर समन्वय दिखाई दिया। मंच पर कैबिनेट मंत्री विजय शाह के साथ-साथ संभागायुक्त भास्कर लक्ष्यकार, आईजी अनुराग, कलेक्टर ऋषव गुप्ता और एसपी अगम जैन मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी निभाते नजर आए, जिससे हजारों श्रद्धालुओं का यह उत्सव पूरी गरिमा के साथ आगे बढ़ा।
यह कहानी उस संकल्प की है जिसे 'आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास' ने साकार करना शुरू किया था। पहले चरण में पर्वत शिखर पर आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची 'एकात्मता की मूर्ति' स्थापित होकर इतिहास रच चुकी है। अब कहानी का दूसरा अध्याय ₹2,195 करोड़ की लागत से बन रहे 'अद्वैत लोक' संग्रहालय के रूप में लिखा जा रहा है, जो भारतीय दर्शन की अमिट गाथा कहेगा।
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर की इस मिट्टी में ज्ञान और तप की सुगंध है। यह मंदिर हमारी नई पीढ़ी को सनातन के मूल विचारों से जोड़ेगा। उन्होंने घोषणा की कि आगामी सिंहस्थ से पहले देश के कोने-कोने में चेतना जगाती हुई एक भव्य 'एकात्म यात्रा' निकाली जाएगी, जिसका अंतिम पड़ाव महाकाल की पावन नगरी उज्जैन होगा।
शिलान्यास के बाद जब मंदिर का नक्शा सामने आया तो हर कोई मुग्ध रह गया। केंद्र में महादेव और चारों कोनों में विष्णु, सूर्य, गणपति और मां भगवती के देवालय होंगे। 16 फीट ऊंचे आधार पर 80 हजार घन फीट गुलाबी बलुआ पत्थर, 100 नक्काशीदार खंभे, 26 फीट चौड़ा गुंबद, चारों दिशाओं में खुलते द्वार और 121 स्वर्णिम कलश मिलकर इस मंदिर को एक अमर कृति का रूप देंगे।
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