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मध्य प्रदेश की आंगनवाड़ियों में पोषण आहार की एक नई शुरुआत हुई है। अगस्त के पहले हफ्ते से महिला समूहों ने खुद टीएचआर तैयार कर बच्चों और गर्भवती माताओं तक पहुंचाना शुरू कर दिया है।
कहानी की शुरुआत अगस्त के पहले हफ्ते से होती है, जब मध्य प्रदेश सरकार ने आंगनवाड़ियों की पुरानी व्यवस्था को बदलकर एक नई शुरुआत करने का फैसला किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सोच के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनवाड़ी केंद्रों पर टेक होम राशन यानी टीएचआर की नई व्यवस्था को हरी झंडी दिखाई। इस बदलाव का सबसे खूबसूरत पहलू यह था कि अब बच्चों का खाना किसी दूर की फैक्ट्री से नहीं, बल्कि गांव की ही महिलाओं के हाथों से बनना तय हुआ।
गांव-गांव में काम कर रहे स्थानीय स्व-सहायता समूहों ने इस जिम्मेदारी को अपने हाथों में लिया। महिलाओं ने खुद साफ-सुथरे तरीके से टीएचआर तैयार करना शुरू किया और उसे अपने ही गांव के आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया। इससे न केवल गांव की महिलाओं को एक नया रोजगार और पहचान मिली, बल्कि माताओं के मन में यह भरोसा भी जागा कि उनके बच्चों को बिल्कुल शुद्ध और सुरक्षित पोषण आहार मिल रहा है।
जैसे ही सुबह आंगनवाड़ी के दरवाजे खुलते हैं, 3 से 6 साल के नन्हे-मुन्ने बच्चों को गरम नाश्ता और ताजा खाना परोसा जाता है। वहीं 6 महीने से 3 साल तक के छोटे बच्चों और गर्भवती व धात्री माताओं के लिए मंगलवार का दिन खास बन गया है, जब उन्हें केंद्र पर गरम खाना मिलता है। बाकी दिनों के लिए उन्हें घर ले जाने के लिए पौष्टिक टीएचआर के पैकेट थमा दिए जाते हैं।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं हर दिन बच्चों को तराजू पर तोलती हैं और उनकी लंबाई नापती हैं। यह सारा डेटा सीधे मोबाइल के पोषण ट्रैकर में दर्ज होता है। जिन बच्चों का वजन बहुत कम या जो गंभीर कुपोषण की श्रेणी में पाए जाते हैं, उन्हें तुरंत अतिरिक्त टीएचआर दिया जाता है। अगर बच्चा ज्यादा कमजोर दिखता है, तो कार्यकर्ता तुरंत स्वास्थ्य विभाग और पोषण पुनर्वास केंद्र से संपर्क कर उसे इलाज दिलाती हैं।
यह कहानी उन बीहड़ों और जंगलों तक भी पहुंची है जहां सहरिया, बैगा और भारिया जनजातियां निवास करती हैं। इन दूरदराज के इलाकों में बच्चों तक पहुंच आसान बनाने के लिए प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के तहत 681 नए आंगनवाड़ी केंद्र खोल दिए गए हैं। अब इन नए केंद्रों पर भी नियमित राशन बंट रहा है और आदिवासी अंचलों में भी बच्चों की सेहत संवरने लगी है।
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