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सालों से वीरान पड़ी मुरैना की कैलारस शुगर मिल की किस्मत अब पलटने वाली है। 19 अगस्त को कैबिनेट के फैसले के बाद एमएसएमई विभाग ने 30 साल की लीज के लिए ऑनलाइन प्रस्ताव मांग लिए हैं।

मुरैना जिले में एक लंबा समय बीत गया जब कैलारस शुगर मिल की मशीनें शांत पड़ गई थीं, लेकिन अब इसे दोबारा शुरू करने की कवायद फिर से तेज हो गई है। कहानी ने तब करवट ली जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद एमएसएमई विभाग ने मिल को लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू कर दी। सरकार को उम्मीद है कि मिल के दोबारा चालू होने से इलाके में सालों से रुकी औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।
कैलारस शुगर मिल के बंद पड़े दरवाजों को खोलने के लिए 19 अगस्त का दिन बेहद अहम रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया था। इसके तहत मिल की जमीन और संपत्तियों को एमएसएमई विभाग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद अब मिल को फिर से शुरू करने के लिए निवेशकों और इच्छुक कंपनियों से प्रस्ताव मंगाने का सिलसिला शुरू हो गया है।
एमएसएमई विभाग ने अपनी कहानी आगे बढ़ाते हुए बताया कि कैलारस शुगर मिल को 'जैसी है, जहां है' के आधार पर लीज पर देने की योजना है। मिल की यह शुरुआती लीज अवधि 30 साल रखी गई है। काम और परियोजना की जरूरत के आधार पर इसे आगे बढ़ाने का प्रावधान भी रखा जा सकता है। सरकार का सीधा सा उद्देश्य ऐसी कंपनी या निवेशक को ढूंढ़ना है, जो मिल को दोबारा संचालित कर सके।
मिल को लीज पर लेने का सपना देखने वाले निवेशकों और कंपनियों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया अब शुरू कर दी गई है। इच्छुक पक्ष आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आसानी से अपने प्रस्ताव जमा कर सकते हैं। कैलारस शुगर मिल की खोई हुई रौनक लौटाने के लिए ऑनलाइन प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर तय की गई है।
अपना प्रस्ताव देने से पहले इच्छुक निवेशकों को यह समझने का मौका दिया जाएगा कि मिल की मौजूदा स्थिति क्या है और वहां क्या संसाधन उपलब्ध हैं। इसके लिए साइट निरीक्षण की व्यवस्था भी कर दी गई है। यह पुरानी मिल मुरैना जिले में एनएच-552 पर रेलवे स्टेशन के पास स्थित है। यहां आज भी फैक्ट्री बिल्डिंग, प्लांट और मशीनरी के साथ करीब 12.86 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है।
कैलारस शुगर मिल के दोबारा शुरू होने से आसपास के पूरे इलाके की आर्थिक स्थिति बदलने की उम्मीद है। मिल के संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के कई अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही गन्ने की खेती करने वाले किसानों, स्थानीय कारोबारियों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के भी अच्छे दिन लौटने की संभावना है।
राज्य सरकार अपनी कहानी के इस हिस्से में बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को दोबारा शुरू करने और उपलब्ध संपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है। कैलारस शुगर मिल को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि 15 सितंबर तक कैसे प्रस्ताव आते हैं और इसके बाद की कहानी क्या होती है।
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