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भाजपा संगठन में बदलाव के बाद अब मोदी कैबिनेट के नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। पढ़िए कि 2027 और 2029 की रणनीति के तहत मंत्रियों की नई टीम तैयार की जा रही है।
भारतीय जनता पार्टी के संगठन में हुए उन बड़े बदलावों से, जिनकी गूंज अब सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय और रायसीना हिल्स तक पहुंच चुकी है। संगठन के पुनर्गठन के बाद अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल की पटकथा तैयार की जा रही है। लक्ष्य बिल्कुल साफ है—2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए एक ऐसी नई और ऊर्जावान टीम तैयार करना जो सरकार और संगठन दोनों को गति दे सके। इस नई कहानी में जहां संगठन में जा चुके पुराने मंत्रियों की कैबिनेट से विदाई की तैयारी है, वहीं कई नए चेहरों के लिए मंत्री पद का दरवाजा खुलने जा रहा है।
मंत्रिमंडल के आंकड़ों के पन्ने पलटें तो मौजूदा समय में मोदी सरकार में 69 मंत्री काम कर रहे हैं, जबकि नियमों के मुताबिक यह संख्या 81 तक जा सकती है। 12 खाली कुर्सियां मौजूद हैं, लेकिन सरकार सभी कुर्सियां भरने के मूड में नहीं है। चर्चा है कि 6 से 7 नए चेहरों को इस बार शपथ दिलाई जाएगी। इस दौड़ में पूर्व केंद्रीय मंत्री और तेजतर्रार युवा नेता अनुराग ठाकुर का नाम सबसे आगे चल रहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक की धरती से आने वाले नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने की योजना बनाई गई है।
इस सियासी कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बना दिया गया। इसके बाद से ही 'एक व्यक्ति-एक पद' के नियम के तहत यह सवाल उठने लगा कि क्या वे मंत्री बने रहेंगे या सिर्फ संगठन का काम देखेंगे। हालांकि, कहानी के इस मोड़ पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और सस्पेंस पूरी तरह से बना हुआ है।
कहानी के दो अन्य किरदार हैं हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी। हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वे केंद्र में सड़क परिवहन और कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हैं। दूसरी तरफ पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हैं और वित्त राज्य मंत्री भी हैं। दोहरी जिम्मेदारी के इस बोझ के बीच चर्चा है कि किसे हटाया जाए। हालांकि, यूपी के सियासी मैदान को देखते हुए पंकज चौधरी की कुर्सी बरकरार रहने की उम्मीद ज्यादा है।
इस फेरबदल की दास्तान में 25 नवंबर की तारीख बेहद अहम है, क्योंकि इसी दिन पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है। उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजा जाएगा या नहीं, इस पर अभी कोहरा छाया हुआ है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि उनके मंत्रालय की चाबी किसी नए नेता को सौंपी जा सकती है। इसके पीछे पेट्रोल और एथेनॉल से जुड़े मुद्दों पर जनता के बीच उपजे असंतोष को भी एक वजह माना जा रहा है।
कहानी का एक अहम हिस्सा सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी जुड़ा है। एथेनॉल नीति को लेकर सोशल मीडिया पर हुए विरोध के बाद यह चर्चा चली कि क्या उनका विभाग बदला जा सकता है। लेकिन जानकारों का कहना है कि गडकरी को हिला पाना किसी के लिए आसान नहीं है। संघ के साथ उनके मजबूत रिश्ते और देश में सड़कों का जाल बिछाने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका इस कहानी का सबसे मजबूत पहलू है।
कहानी के अंतिम पड़ाव में महाराष्ट्र की राजनीति से एक नया चेहरा केंद्र की ओर बढ़ता दिख रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे को मोदी कैबिनेट में शामिल करने की पूरी तैयारी है। श्रीकांत शिंदे को मंत्री बनाकर भाजपा महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ अपने रिश्ते को और ज्यादा गहरा और मजबूत करना चाहती है ताकि आने वाले चुनावों में गठबंधन मजबूती से खड़ा रहे।
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