Loading...
Loading...
भोपाल के रवींद्र भवन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने जीवन के पन्ने पलटे। उन्होंने उज्जैन में नदी तैरकर खेत जाने से लेकर आज मुख्यमंत्री रहते हुए खेतों में धान बोने तक की पूरी दास्तान सुनाई।
भोपाल के रवींद्र भवन के उस मंच से, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने सैकड़ों युवा छात्र बैठे थे और माहौल बेहद आत्मीय था। जब छात्रों ने मुख्यमंत्री से उनके निजी जीवन और खेती के बारे में सवाल पूछे, तो सीएम ने पुरानी यादों के पन्ने खोल दिए। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वे आज भी जब मौका मिलता है, अपने खेतों की पगडंडियों पर चले जाते हैं, क्योंकि जो असीम आनंद खेत की मिट्टी में पसीना बहाने में मिलता है, उसकी तुलना किसी पद या वैभव से नहीं की जा सकती।
कहानी का पहला अध्याय उनके छात्र जीवन का है। डॉ. मोहन यादव ने बताया कि उनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। जब वे कॉलेज पहुंचे और छात्र राजनीति की दुनिया में कदम रखकर चुनाव लड़ रहे थे, तब भी सुबह-शाम खेतों में काम करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। किताबों की पढ़ाई, छात्र राजनीति के भाषण और खेतों में हल चलाने का काम, तीनों एक साथ चले और इसी संतुलन ने उन्हें जीवन की कठिन परिस्थितियों से लड़ना सिखाया।
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए सीएम ने उज्जैन के अपने पुराने खेतों का एक रोमांचक संस्मरण सुनाया। उन्होंने बताया कि उनके खेत नदी के उस पार हुआ करते थे और पुल न होने के कारण कई बार नदी के गहरे पानी में बैल के साथ तैरकर ही खेत तक पहुंचना पड़ता था। उस जमाने में सिंचाई केवल बादलों की मेहरबानी पर टिकी थी। बाद में उन्होंने कुएं खुदवाए और खुद अपने हाथों से बिजली के भारी तार खींचकर दूर खेतों तक लेकर गए। उस दौर के संघर्षों ने उन्हें बहुत मजबूत बनाया।
वक्त बदला और आज वही किसान पुत्र मध्य प्रदेश का मुखिया है। सीएम ने कहानी को आज के दौर से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने जो परेशानियां झेलीं, वे आज का किसान न झेले, इसलिए सरकार ने हर खेत तक पानी पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। आज आधुनिक नहरों, मोटरों और तकनीकों के आने से खेती की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और किसानों के लिए खेती करना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है।
छात्रों ने जब पूछा कि आज मुख्यमंत्री बनने के बाद भी खेती का मोह क्यों नहीं छूटता, तो सीएम ने अपने हालिया दौरे की बात बताई। उन्होंने कहा कि वे आज भी न केवल अपने खेतों में जाते हैं, बल्कि प्रदेश के किसानों के बीच खेतों में उतर जाते हैं। उन्होंने धान के खेत में उतरकर कीचड़ के बीच धान बोने का अपना संस्मरण साझा करते हुए कहा कि पौधों को रोपने का वह सुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
कहानी के अगले पड़ाव में सीएम ने किसान के पसीने की सही कीमत का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार एमएसपी पर फसलों की खरीद कर रही है और उस पर बोनस भी दे रही है। उन्होंने याद दिलाया कि मध्य प्रदेश देश की पहली ऐसी धरती बनी जिसने किसानों के घाटे को पाटने के लिए 'भावांतर योजना' की शुरुआत की, ताकि किसान कभी बेबस महसूस न करे।
कहानी के समापन पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बदलती कृषि का भव्य चित्र खींचा। उन्होंने बताया कि सरकार ने 'कृषि कल्याण वर्ष' की घोषणा की है। आज का युवा किसान केवल गेहूं-धान तक सीमित नहीं है, वह मोती, मशरूम और शहद की खेती से लाखों कमा रहा है। सीएम ने गर्व से कहा कि जिस जमीन पर कभी साल में एक ही फसल बमुश्किल होती थी, आज वहां की उपजाऊ मिट्टी साल में तीन-तीन फसलें उगल रही है।
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है।
पहली टिप्पणी करने वाले बनें!
हमारे साथ जुड़ें
ताज़ा ख़बरों और अपडेट्स के लिए हमारे इंस्टाग्राम पेज को फॉलो करें और हमारे कम्युनिटी का हिस्सा बनें।
फॉलो करें