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शिक्षक भर्ती 2023 के अभ्यर्थियों का तीन साल का सब्र अब भोपाल की सड़कों पर छलक उठा है। 21 अगस्त की रात से शुरू हुए नरेंद्र राजपूत के अनशन और 24 से 26 अगस्त के तीन दिवसीय धरने की पूरी दास्तान।
मध्य प्रदेश के उन हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों के संघर्ष की है, जिनकी मेहनत और उम्मीदें तीन साल से फाइलों में दबी हुई हैं। साल 2023 की उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती के वेटिंग अभ्यर्थी जब थक-हार गए, तो उनका यह लंबा इंतजार आखिरकार भोपाल के नीलम पार्क में एक बड़े आंदोलन के रूप में फूट पड़ा। दूसरी काउंसलिंग और खाली पदों पर भर्ती की आस लिए अभ्यर्थी खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे हैं, जबकि ब्यावरा के नरेंद्र राजपूत 21 अगस्त की रात से भूख-प्यास त्यागकर आमरण अनशन पर अपनी जिंदगी दांव पर लगाए हुए हैं।
इस संघर्ष की अगली कड़ी के रूप में अभ्यर्थियों ने 24 से 26 अगस्त तक तीन दिवसीय विरोध प्रदर्शन की शुरुआत की है। वेटिंग शिक्षक संघ, वर्ग-1 भर्ती 2023 के बैनर तले दूर-दराज के जिलों से आए अभ्यर्थी अंबेडकर पार्क, टीटी नगर और नीलम पार्क में इकट्ठा होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। हर चेहरे पर सिर्फ एक ही मांग है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण को बिना देर किए फौरन शुरू करे।
अभ्यर्थी अपनी पुरानी दास्तान बयां करते हुए बताते हैं कि भर्ती प्रक्रिया को शुरू हुए तीन साल का वक्त बीत चुका है। दिन-रात एक करके उन्होंने कठिन परीक्षाएं पास कीं और चयन के सभी जरूरी चरण पार किए। लेकिन अफसोस कि आज तक दूसरी काउंसलिंग की तारीख नहीं आई। स्कूलों में आज भी शिक्षकों की कुर्सियां खाली पड़ी हैं, फिर भी परीक्षा पास कर चुके इन होनहारों को स्कूलों की चौखट के बजाय धरने पर बैठना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की यह मांग कोई नई नहीं है; वे लंबे समय से प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 में पदों की संख्या बढ़ाकर 25 हजार और माध्यमिक शिक्षक वर्ग-2 में कम से कम 3 हजार पद करने की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार इन खाली पदों को जोड़ दे, तो सालों से नियुक्ति का सपना देख रहे सैकड़ों परिवारों के घरों में खुशियों के दीये जल सकते हैं।
इस संघर्ष का सबसे मार्मिक अध्याय ब्यावरा के नरेंद्र राजपूत लिख रहे हैं, जो धरना स्थल पर 42 घंटे से आमरण अनशन पर हैं। 21 अगस्त की रात ठीक 12 बजे उन्होंने अन्न और जल का त्याग कर दिया था। नरेंद्र का कहना है कि यह भूख-प्यास उनके अकेले की नहीं, बल्कि उन तमाम शिक्षक अभ्यर्थियों के आंसुओं की है जिन्होंने अपना सब कुछ इस परीक्षा की तैयारी में झोंक दिया था।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे इस मुकाम पर अचानक नहीं पहुंचे। बीते महीनों में उन्होंने अनगिनत बार शासन-प्रशासन के दरवाजे खटखटाए, ज्ञापन सौंपे और शांतिपूर्ण धरने दिए। हर बार उन्हें केवल मीठे आश्वासन की घुट्टी पिलाई गई, लेकिन न तो दूसरी काउंसलिंग हुई और न ही पदों में कोई बढ़ोतरी की गई। इसी टूटे हुए भरोसे ने उन्हें आज दोबारा भोपाल की सड़कों पर ला खड़ा किया है।
धरने पर बैठे नरेंद्र राजपूत और उनके साथी पूरी संजीदगी से कहते हैं कि वे किसी भी तरह का उपद्रव नहीं चाहते। वे गांधीवादी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी पीड़ा सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका बस यही कहना है कि जिन युवाओं ने अपनी जवानी के कई साल शिक्षक बनने के सपने को दिए हैं, उन्हें खाली पड़े पदों पर नियुक्ति देकर उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
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