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भोपाल की सड़कों पर नियुक्ति की आस में बैठे शिक्षक अभ्यर्थियों की कहानी में तब नया मोड़ आया, जब दिग्विजय सिंह ने वहां पहुंचकर 5 सितंबर के बाद खुद भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान कर दिया।
भोपाल में शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का आंदोलन अपने रोजमर्रा के तरीके से चल रहा था, तभी वहां पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के पहुंचने से कहानी में एक नया मोड़ आ गया। आंदोलनकारियों के बीच पहुंचते ही भूख हड़ताल पर बैठी महिला अभ्यर्थियों ने उन्हें राखी बांधी। इस आत्मीय पल के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस तक इन युवाओं की मांगें नहीं मानी गईं, तो वे खुद 24 घंटे की भूख हड़ताल करेंगे।
दिन के उजाले में दिग्विजय सिंह ने उन अभ्यर्थियों से एक-एक करके बात की, जो पद बढ़ाने और नियुक्ति की आस में भोपाल की सड़कों पर बैठे हैं। भूख हड़ताल कर रही बहनों से राखी बंधवाने का पल काफी भावुक रहा। उन्होंने उन सभी को गले से लगाते हुए यह भरोसा दिलाया कि इस कठिन सफर में वे उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और दिग्विजय सिंह ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि अभ्यर्थियों की हर एक मांग पूरी तरह जायज है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं 80 साल का नौजवान हूं, आपकी यह लड़ाई हम लड़ेंगे।" इसके बाद उन्होंने फिर याद दिलाया कि अगर 5 सितंबर तक कोई फैसला नहीं हुआ, तो वे खुद 24 घंटे के लिए इस भूख हड़ताल का हिस्सा बन जाएंगे।
भीड़ के बीच खड़े होकर पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बीते हुए कार्यकाल की कुछ पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि जब वे सत्ता में थे, तब शिक्षा और स्वास्थ्य ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता हुआ करते थे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी शिक्षा बहुत जरूरी है। उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में स्कूल खोलने से जुड़ी अपनी पुरानी कहानियों का भी जिक्र किया।
दिग्विजय सिंह ने उस दौर की बात बताते हुए दावा किया कि उनकी सरकार ने उन पिछड़े इलाकों में स्कूल खोलने पर जोर दिया, जहां बच्चों को पढ़ने के लिए मीलों दूर पैदल जाना पड़ता था। उन्होंने बताया कि उस समय करीब 45 हजार नए स्कूल खोले गए थे। यही नहीं, शिक्षकों की नियुक्ति के सारे अधिकार भी भोपाल से छीनकर नीचे जिलों, जनपदों और ब्लॉक स्तर पर बांट दिए गए थे।
कहानी आगे बढ़ी तो उन्होंने वर्तमान सरकार की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) और भर्ती प्रक्रिया पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक पहले से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उन्हें नए सिलेबस के आधार पर फिर से परीक्षा देने को कहना बिल्कुल गलत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारों पद खाली होने के बाद भी सरकार ने बहुत कम नियुक्तियां की हैं। हालांकि, ये सभी आरोप पूरी तरह से राजनीतिक माने जा रहे हैं।
इस मुलाकात के अंत में दिग्विजय सिंह ने सीधे मुख्यमंत्री को चेतावनी दे डाली कि अगर शिक्षक दिवस तक इन युवाओं की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठेंगे। जाते-जाते उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों को यह नेक सलाह दी कि वे अपना यह आंदोलन बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखें। उन्होंने सभी को पक्का विश्वास दिलाया कि वे उनकी मांगों को लेकर हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे।
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