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मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भंग कर नए सिरे से गठन करने पर विचार किया जा रहा है। भोपाल में हुई पीएसी की बैठक में कार्यकारिणी का आकार छोटा करने और वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी देने पर मंथन हुआ।
भोपाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के सांगठनिक ढांचे को ऐसे ही नहीं, बल्कि पूरी तरह बदलकर नए सिरे से खड़ा करने वाली बात धीरे धीरे फिर से हवा पकड़ रही है। पार्टी के अंदर चल रही हलचल के इशारे पॉलिटिकल अफेयर कमेटी यानी PAC की बैठक में देखने को मिले, जहां संगठन को और ज्यादा “टाइट” बनाने और तमाम पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां को नए ढंग से सेट करने को लेकर काफी देर तक माथा पच्ची हुई।
अभी के हालात देखें तो मध्य प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी में करीब 328 पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं, और इस संख्या को लेकर पार्टी के भीतर अब तरह तरह के सवाल उठने लगे हैं। PAC की बैठक में इस पर गंभीरता से विचार हुआ कि इस बड़ी कार्यकारिणी का आकार कम किया जाए, और संगठन में केवल सीमित लेकिन सच में सक्रिय रहने वाले पदाधिकारियों को ही अहम जिम्मेदारी दी जाए, ताकि कामकाज में असर ज्यादा हो, साथ ही तेजी भी आए.
बैठक में सांगठनिक नियुक्तियों का मुद्दा भी सामने आया। पार्टी के नेताओं ने साफ कहा कि जिन वरिष्ठ नेताओं से नामों के सुझाव मांगे जाते हैं, उनके विचारों को मन से नहीं, पूरी गंभीरता से लेना चाहिए. उनका तर्क यह है कि जो लोग स्थानीय स्तर की जमीनी हकीकत और जरूरत को बेहतर तरीके से समझते हैं, उन्हें जिम्मेदारी मिलने से पार्टी को राजनीतिक लिहाज से काफी फायदा हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ, जिलों में पहले हो चुकी नियुक्तियों को लेकर बैठक में कई सवाल भी रखे गए.
कांग्रेस के भीतर यह चर्चा भी चल रही है कि प्रदेश और जिला स्तर पर कई ऐसे वरिष्ठ नेता हैं, जिन्हें अभी तक पार्टी की तरफ से कोई ठोस, उचित जिम्मेदारी नहीं मिल पाई है। ऐसे उपेक्षित और अनुभव वाले नेताओं को संगठन के ढांचे में सही जगह देने की जरूरत पर लगातार जोर दिया जा रहा है। आंतरिक तौर पर कहा जा रहा है कि नई कार्यकारिणी बनाते समय सिर्फ कार्यकुशलता नहीं बल्कि लंबे समय से संगठन के लिए पसीना बहाने वाले लोगों को भी विधिवत समायोजन मिलना चाहिए.
PAC के सदस्य, और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने बैठक में हुई चर्चाओं के बारे में कुछ बातें साझा कीं. उन्होंने बताया कि संगठन के पुनर्गठन को लेकर गंभीर बातचीत हुई. डॉ. सिंह के मुताबिक कई स्तरों पर लोगों को लेकर शिकायतें आ रही थीं, और प्रदेश तथा जिलों में कई पदाधिकारियों को उनका सही दायित्व नहीं मिल पाया, इसलिए कमेटी की संख्या घटाने, और वरिष्ठ नेताओं को एडजस्ट करने जैसे बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है.
डॉ. गोविंद सिंह ने पार्टी में पदाधिकारियों की सक्रियता और उनकी जन-पहचान को लेकर भी तीखे सवाल उठाए. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पार्टी में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो पदों पर तो बैठे हैं लेकिन जिन्हें खुद पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता तक नहीं जानते. उन्होंने एक उदाहरण भी दिया कि वे अपने ही जिले के किसान कांग्रेस अध्यक्ष से परिचित नहीं हैं. इन विसंगतियों को ध्यान में रखते हुए अब कांग्रेस संगठन के पुनर्गठन में उन नेताओं को आगे रखने पर जोर दे रही है जिनकी जमीनी स्तर पर मजबूत पहचान हो, और जो सच में सक्रिय रहते हों.
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