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इंदौर में न्याय सम्मेलन के दौरान मोहन यादव ने मध्यस्थता, तकनीक और न्याय व्यवस्था में बदलाव से जुड़े विषयों पर बात रखी।
भोपाल। इंदौर में शनिवार को मध्य प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (MPSLSA) की तरफ से ‘Enhancing Access to Justice’ विषय पर वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई, लोग जुटे और माहौल भी काफी गरम सा रहा। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस मौके पर कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे, और उन्होंने न्याय तक आसान पहुँच, तथा विवादों का जल्द निपटारा… जैसी बातों पर अपनी राय रखी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि छोटे, छोटे विवादों को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने वाले सिस्टम से अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम होने लगी है। उनका कहना था कि जब किसी मामले का हल आपसी सहमति से निकल जाता है तो लोगों को लंबी चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से बचाया जा सकता है।
उन्होंने भारत की पारंपरिक विवाद निवारण शैली का भी जिक्र किया, कि संवाद और सहमति के जरिए मामले सुलझाने की परंपरा बहुत समय से चली आ रही है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय न्याय परंपराओं का संदर्भ देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पंच परमेश्वर की व्यवस्था से लोग आपसी बातचीत कर के, और फिर सहमति बनाकर, विवादों को सुलझाते रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान में भी देश की पुरानी न्याय परंपराओं की भावना साफ तौर पर झलकती है। इसी क्रम में उन्होंने न्यायालयों को न्याय का मंदिर कहा जाने का उल्लेख किया।
डॉ. यादव ने न्यायिक सिस्टम में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल लेकर भी बातें की। उन्होंने ई-फाइलिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, वन डेटा-वन केस, वर्चुअल सुनवाई और आधुनिक न्याय प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं का हवाला दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन तकनीकी तरीकों से न्यायिक कामों को ज्यादा ढंग से व्यवस्थित किया जा रहा है, और प्रक्रिया को प्रभावी बनाये जाने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं।
डॉ. यादव ने आगे कहा कि औपनिवेशिक दौर से चले आ रहे कई कानूनों को हटाकर नए कानून लागू किए गए हैं। इस संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए कानूनी सुधारों का उल्लेख किया, और जन-विश्वास अधिनियम को एक उदाहरण मानकर पेश किया।
उन्होंने यह भी कहा कि छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना, जैसे कदम—कानूनों को आसान बनाने में मदद करते हैं, और नागरिकों के लिए प्रक्रिया को और सुविधाजनक बनाते हैं।
मध्यप्रदेश में न्याय व्यवस्था से जुड़े बदलावों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर दिया गया है।
उन्होंने इसे प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए समान कानून की दिशा में एक अहम कदम बताया। सम्मेलन में न्याय तक पहुँच, मध्यस्थता, तकनीकी बदलाव और कानूनी सुधार जैसे मुद्दे ही प्रमुख रूप से चर्चा के केंद्र रहे।
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