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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों के हितों को लेकर उनका रवैया दोहरा है। उन्होंने बिना वास्तविक तथ्यों के राजनीति करने और संसद की कार्यवाही बाधित करने पर कड़ा ऐतराज जताया है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयानों और संसद की चलती कार्यवाही को लेकर जो रुख अपनाया है, वह थोड़ा सा अलग ही, और फिर भी छात्र -हित वाले कोण से, राजनीतिक तौर पर काफी चर्चा में आ रहा है। भोपाल में दिए गए अपने बयानों के जरिये मुख्यमंत्री ने ये बात कही कि विद्यार्थियों, युवाओं से जुड़े संवेदनशील विषयों को बस राजनीतिक नफा-नुकसान के हिसाब से नहीं तौला जाना चाहिए, वरना उसका असर सीधा समाज और भविष्य पर पड़ता है। उनके अनुसार, इस पर बोलने से पहले वास्तविक साक्ष्य और ठोस तथ्यों का होना बेहद जरूरी है।
सीएम मोहन यादव ने राहुल गांधी की कार्यशैली पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि एक तरफ राहुल लगातार छात्रों के हक और उनकी भलाई की बात करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ झारखंड के छात्रों से जुड़े गंभीर मामलों पर उनकी खामोशी या अलग -सा रुख साफ दिखाता है कि मामला दोहरे मानक का है। मुख्यमंत्री का कहना है कि अगर विपक्ष सचमुच विद्यार्थियों के भविष्य और अधिकारों को लेकर चिंतित है, तो फिर हर राज्य के युवाओं की दिक्कतों को लेकर भी उन्हें समान रूप से, निष्पक्षता के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। युवाओं के भविष्य वाले मुद्दों को यूं ही, केवल राजनीतिक रंगों में ढाल देना न समाज के लिए सही है, न ही उनके साथ न्याय जैसा कहलाता है।
सीएम ने यह भी जताया कि बिना किसी वास्तविक और पुख्ता घटना के, संसद जैसे मंचों पर बयान देना उचित नहीं है। उन्होंने नीट के बाद अब छात्र आंदोलनों के संदर्भ में गोली चलने जैसी बातों का उल्लेख करके सवाल खड़ा किया कि जब ऐसी घटना घटी ही नहीं है, तो फिर जनता और समाज को उलझाने वाला शोर क्यों किया जा रहा है। उनके मुताबिक, पिछले करीब 15 दिनों से संसद में अलग-अलग मुद्दों पर लगातार हंगामा हो रहा है, जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही ठप या बाधित हो रही है। इस वजह से देश के जरूरी, बुनियादी विषयों से ध्यान भटक रहा है।
लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हवाला देते हुए मोहन यादव ने कहा कि विपक्ष को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, मगर यह सब सदन के अंदर, तथ्यों पर टिके स्वस्थ संवाद के जरिए होना चाहिए। सरकार हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार है, बस शर्त यही है कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने दी जाए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बिना आधार के, समाज को भटकाने वाले ऐसे विरोधाभासी बयानों के खिलाफ, इस मामले में राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए।
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