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मध्य प्रदेश के 1.5 लाख शिक्षकों को दशकों बाद फिर से परीक्षा देनी पड़ेगी। कर्मचारी चयन मंडल ने MP TET 2026 का शेड्यूल जारी कर दिया है। 21 अगस्त से 4 सितंबर तक 1000 रुपये शुल्क के साथ फॉर्म भरे जाएंगे और 12 अक्टूबर को परीक्षा होगी।
यह कहानी मध्य प्रदेश के उन डेढ़ लाख शिक्षकों की है, जिनकी जिंदगी में दशकों बाद फिर से 'परीक्षा' की घड़ी आ गई है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने आखिरकार शिक्षक पात्रता परीक्षा (MP TET 2026) की तारीख, और टाइम टेबल की पूरी तस्वीर साफ कर दी है। अब पूरे प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को फिर से किताबों की तरफ लौटना होगा, यानी “परीक्षा” का मूड। कहानी के शुरुआती पन्ने पर 21 अगस्त से ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खुलेगी और 4 सितंबर को यह बंद हो जाएगी, ठीक इसी बीच वाले समय में उन्हें सब कुछ निपटाना होगा।
इस कहानी का असली केंद्र बिंदु वे शिक्षक हैं, जिन्हें 1998 से लेकर 2009 के बीच सरकारी व्यवस्था में नियुक्त किया गया था। सालों साल सेवा देने के बाद अब ऐसा वक्त आया है जब इन पुराने शिक्षकों को फिर से अपनी योग्यता और पात्रता साबित करने के लिए परीक्षा हॉल में बैठना पड़ेगा । इस चुनौती से पार पाने के लिए 21 अगस्त से 4 सितंबर के बीच अपने आवेदन जरूर सुनिश्चित करने होंगे।
फिर जैसे जैसे कथा आगे बढ़ेगी, फॉर्म भरने वाले शिक्षकों को 21 अगस्त से लेकर 9 सितंबर तक आवेदन में संशोधन करने का एक मौका भी दिया जाएगा। इस सफर में हिस्सा लेने के लिए हर अभ्यर्थी को 1000 रुपये का परीक्षा शुल्क चुकाना होगा। और उसके बाद आएगा वो बड़ा दिन—12 अक्टूबर, यहीं पर प्रदेश भर में यह महापरीक्षा होगी। सफर की शुरुआत में, आवेदन प्रक्रिया के दौरान सभी अभ्यर्थियों को दिशा निर्देशों का पूरा पुलिंदा भी दिया जाएगा।
परीक्षा के भीतर की कहानी कुछ यूं है कि प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में कुल 150 प्रश्न होंगे। हर प्रश्न का एक अंक रखा जाएगा, यानी कुल 150 अंक। इस चुनौती को पूरा करने के लिए घड़ी की सुइयां 2 घंटे 30 मिनट तक चलेंगी। लेकिन एक राहत वाली बात भी है: परीक्षा में कोई निगेटिव मार्किंग नहीं होगी। यानी गलत उत्तर देने के डर से, अभ्यर्थियों को ज्यादा घबराना नहीं पड़ेगा।
अंतिम पड़ाव में रिजल्ट और कटऑफ की कहानी होगी। परीक्षा में सफल होने के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थियों को 50 प्रतिशत अंक हासिल करने की शर्त पूरी करनी होगी। वहीं सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक पासिंग माने जाएंगे। अब बस यही देखना है कि 12 अक्टूबर को ये डेढ़ लाख शिक्षक इस कहानी के अंत में अपनी पात्रता कैसे, और किस तरह साबित करते हैं।
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