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महिला पहलवान मामले में बृजभूषण शरण सिंह को कोर्ट से बरी किया गया। जानिए 127 सुनवाई के बाद आया फैसला और आगे क्या होगा।
नई दिल्ली। करीब तीन साल तक देशभर में चर्चा का विषय रहे महिला पहलवानों के यौन शोषण वाले केस में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को काफी बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें, और WFI के पूर्व सचिव विनोद तोमर को, सभी धाराओं से बरी कर दिया। आदेश सुनाए जाने के वक्त दोनों लोग कोर्ट के अंदर मौजूद थे। कोर्ट के बाहर निकलते ही बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें शुरू से न्यायपालिका पर भरोसा रहा है, और आखिरकार अदालत ने सम्मान के साथ उन्हें बरी कर दिया।
ये मामला जनवरी 2023 में सामने आया, जब देश की कई चर्चित महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के संगीन आरोप लगाए। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और अन्य खिलाड़ियों के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबा धरना लगा, फिर देखते देखते ये बात पूरे देश तक फैल गई। उस समय बृजभूषण भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष थे, और मामला राष्ट्रीय राजनीति से लेकर खेल जगत तक, हर जगह सुर्खियों में रहा।
सुनवाई करीब तीन साल चली। कोर्ट में कुल 127 बार तारीख लगी। 2 जुलाई 2026 को दोनों तरफ की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित रख लिया था। फिर एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार ने फैसला पढ़ते हुए बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट के आधार पर मई 2024 में आरोप तय किए थे, और ट्रायल शुरू हो गया था।
आपराधिक मामले में बरी का मतलब ये निकाला जाता है कि उपलब्ध सबूतों के सहारे आरोप साबित नहीं हो सके। इसलिए आरोपी को सजा नहीं होती। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि हर आरोप को अदालत ने एकदम झूठा ही घोषित कर दिया है। अगर शिकायतकर्ता पक्ष चाहे तो तय प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ चुनौती दी जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, मई 2023 में दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की। प्रारंभ में छह महिला पहलवानों ने शिकायत दी थी, फिर बाद में एक नाबालिग पहलवान ने अपनी शिकायत वापस ली और अपना बयान पलट दिया। वहीं बृजभूषण लगातार यही कहते रहे कि ये आरोप झूठे हैं, और ये किसी साजिश का हिस्सा है।
शिकायतों में अलग-अलग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दौरान कथित अनुचित व्यवहार का जिक्र था। बुल्गारिया, जापान, बिसकेक, लखनऊ, कर्नाटक, मंगोलिया और जकार्ता से जुड़ी कई घटनाओं का उल्लेख भी शिकायत में मिलता है। इन्हीं दावों की वजह से पुलिस जांच आगे बढ़ी, और फिर अदालत में ट्रायल हुआ।
कोर्ट से राहत मिलने के बाद समर्थकों ने उनके आवास पर फूल बरसाकर स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “होइहि सोइ जो राम रचि राखा।” उनके बेटे करण भूषण ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सत्य की जीत हुई है। दूसरी तरफ WFI अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा कि अदालत के निर्णय से कुश्ती जगत में खुशी का माहौल है।
18 जनवरी 2023 को महिला पहलवानों ने जंतर-मंतर पर धरना देना शुरू किया। उसके बाद भारतीय ओलंपिक संघ ने जांच समिति बनाई और खेल मंत्रालय ने भी मामले में दखल दिया। सरकार और खिलाड़ियों के बीच कुछ दौर की बातचीत हुई। मई 2023 में पहलवान अपने मेडल गंगा में बहाने हरिद्वार भी पहुंचे, पर फिर बाद में ये कार्यक्रम टाल दिया गया। फिर जून 2023 में सरकार के साथ लंबी बैठक के बाद आंदोलन को स्थगित कर दिया गया।
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