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मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध के बाद उपभोक्ताओं को जागरूक करने और सही पहचान बताने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों को खरीदारी के समय लेबल्स और FSSAI मानकों की जांच करने की सलाह दी गई है।
मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले बड़े फैसले के बाद अब सरकार का फोकस सिर्फ कार्रवाई पर नहीं है बल्कि उपभोक्ताओं को सच में समझाने पर भी है। महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ की तरह ही चलते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को गुजरात की तरफ रवाना होने से पहले भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का असल लक्ष्य उपभोक्ताओं को भ्रामक चीजों से बचा कर वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण डेयरी प्रोडक्ट्स मुहैया कराना है, ठीक तरीके से।
अब आम नागरिकों के लिए यह जानना जरूरी है कि एनालॉग पनीर को अक्सर दूध से बना पारंपरिक पनीर बताकर बेचा जाता है, पर असल में यह दूध के साथ या उसकी जगह पाम ऑयल, वनस्पति वसा, स्टार्च और कुछ अन्य चीजें मिलाकर तैयार किया जाता है। इसे पूरी तरह नकली कहना शायद तकनीकी तौर पर हमेशा सही नहीं होगा, पर दिक्कत वहीं आती है जब इसे असली डेयरी पनीर के नाम पर बेच दिया जाता है। इसी उपभोक्ता-भ्रम को रोकने के लिए अब स्पष्ट पहचान और सही लेबलिंग पर जोर दिया जा रहा है, बिना किसी झोल के।
मैन स्ट्रीम बाजार में पारंपरिक डेयरी पनीर की कीमत अक्सर 350 से 450 रुपए प्रति किलो या फिर उससे भी ज्यादा तक पहुंच जाती है। जबकि जो विकल्प के रूप में बिकने वाला एनालॉग पनीर है, उसके बारे में दावा किया जाता है कि वह लगभग 150 से 250 रुपए प्रति किलो तक मिल सकता है। दाम का यह फर्क होने के कारण होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग जैसी जगहों पर इसका इस्तेमाल होने की संभावना ज्यादा रहती है , और इसका सीधा असर लोगों के खाने पर पड़ता है। सरकार की इस तरह की रोक के बाद अब उम्मीद ये है कि व्यापारी स्तर पर भी शुद्धता को प्राथमिकता दी जाएगी, वरना कहानी वही पुरानी।
उपभोक्ताओं को जागरूक करते हुए अधिकारियों की तरफ से यह सलाह दी गई कि वे पैकेट लेकर खरीदें तो सामग्री की सूची, यानी Ingredients को ध्यान से पढ़ें। कई बार पैकेट पर FSSAI लाइसेंस या उससे जुड़ी जानकारी भी दी होती है, और साथ ही उत्पाद में इस्तेमाल हुई सामग्री का पूरा ब्योरा होना चाहिए। अगर किसी लेबल पर साफ तौर पर 'Analogue', 'Imitation' या 'Vegetable Fat' जैसी बातें लिखी हों, तो समझिए वह पारंपरिक डेयरी पनीर नहीं है। इसलिए बिना लेबल वाले या खुले में मिलने वाले पनीर की खरीद से बचना ही बेहतर है, भले ही कीमत थोड़ी कम लगे।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि हर एनालॉग पनीर को सीधे-सीधे खतरनाक मान लेना ठीक नहीं है। असली स्वास्थ्य वाली चिंता तब पैदा होती है जब इसमें खराब गुणवत्ता वाला तेल, अत्यधिक हाइड्रोजेनेटेड वनस्पति तेल या फिर खाद्य सुरक्षा मानकों के खिलाफ सामग्री का उपयोग किया जाए। अब सरकार के सख्त निर्देशों के बाद बाजार में जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया को और आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि लोगों को सुरक्षित , उच्च गुणवत्ता वाले और वास्तविक डेयरी जैसे उत्पाद मिल सकें।
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