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नेपाल में बाढ़ के बाद मलबे से निकलती लाशों और अपनों को तलाशते 2 हजार से अधिक लापता लोगों का दर्द अभी थमा भी नहीं था कि तिब्बत की एक रहस्यमयी झील ने नए खतरे की घंटी बजा दी। पढ़िए इस त्रासदी की पूरी कहानी।
यह दास्तान नेपाल के उन खूबसूरत पहाड़ी गांवों की है, जहां कुछ ही घंटों के भीतर सब कुछ मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। विनाशकारी बाढ़ के बाद वहां के हालात संभलने के बजाय और ज्यादा भयावह होते जा रहे हैं। एक तरफ जहां मलबे से निकलती लाशों के अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं, वहीं 2 हजार से ज्यादा अपनों की तलाश में लोग बदहवास भटक रहे हैं। कहानी का सबसे खौफनाक मोड़ तब आया, जब चीन ने सरहद पार तिब्बत के पहाड़ों में बनी एक विशाल झील के बदलते मिजाज को लेकर नेपाल को एक और नए खतरे की चेतावनी थमा दी।
बाढ़ का पानी जैसे ही थोड़ा कम हुआ, तबाही की खौफनाक तस्वीरें सामने आने लगीं। स्थानीय पुलिस और मीडिया के पास जो आंकड़े पहुंच रहे हैं, उनमें मौतों का दर्द साफ दिखाई देता है। नेपाल पुलिस की एक रिपोर्ट ने 616 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की, तो वहीं स्थानीय पत्रकारों की रिपोर्टों में यह संख्या 626 तक पहुंच गई। उधर तिब्बत की वादियों में भी 7 बेगुनाहों की जान चली गई। यानी कुल मिलाकर 600 से अधिक जिंदगी के चिराग हमेशा के लिए बुझ चुके हैं।
इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक अध्याय उन 2 हजार से ज्यादा लापता लोगों का है, जिनका अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। टूटी हुई सड़कों और कीचड़ से पटी घाटियों में बचाव दल अपनी जान जोखिम में डालकर जिंदगियां ढूंढ रहे हैं। लेकिन पहाड़ों से लगातार गिरते पत्थरों और भूस्खलन ने इस खोज अभियान के रास्ते में हर कदम पर कांटे बिछा दिए हैं, जिससे अपनों की राह देख रहे परिवारों की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं।
अभी लोग संभल भी नहीं पाए थे कि कहानी में एक नया खौफ जुड़ गया। चीन ने सीमा पार से संदेश भेजा कि ल्हेन्डे नदी के ऊपरी हिस्से में जो कुदरती झील बनी हुई है, उसका पानी अचानक गहरा होने लगा है। वैज्ञानिक इस बात से डर गए हैं कि पानी का यह गहरा रंग तलहटी में जमा होते मलबे और पानी के बेकाबू दबाव का संकेत है। चीन ने साफ चेतावनी दी है कि यह झील कभी भी टूट सकती है या फिर भारी भूस्खलन से तबाही का नया सैलाब आ सकता है।
इस नए डर के सामने आते ही नेपाल-तिब्बत सीमा के ग्यारोंग पोर्ट पर जिंदगी की रक्षा के लिए पहरा सख्त कर दिया गया। आसमान में ड्रोन मंडराने लगे हैं जो पहाड़ी ढलानों पर नजर रख रहे हैं और जमीन पर चौकियां बनाकर हर हलचल को रिकॉर्ड किया जा रहा है। नदी के किनारों पर रहने वाले डरे-सहमे लोगों को लाउडस्पीकर पर चेतावनी देकर ऊंचे पहाड़ों की तरफ भेजा जा रहा है, ताकि कुदरत का अगला वार खाली जाए।
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