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उज्जैन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिक्षा, गुरु परंपरा, 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि, 10 हजार शिक्षक भर्ती और AI आधारित शिक्षण को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं।
मध्य प्रदेश. उज्जैन में महर्षि सांदीपनि गुरुपर्व और अलंकरण समारोह कुछ ज्यादा ही चर्चित रहा। यहाँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय संस्कृति, शिक्षा और गुरु परंपरा को लेकर अपने भाव रखे, थोड़ा सा जोर देकर कहा कि उज्जयिनी बस धार्मिक आस्था का ठिकाना नहीं है, बल्कि ज्ञान, संस्कार और कर्म की पुरानी धरोहर वाली जमीन भी है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ली थी, और फिर आगे चलकर गीता के जरिए पूरी मानवता को जीवन का एक अमूल्य संकेत दिया गया।
मुख्यमंत्री ने मंच से स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति में गुरु और माता-पिता की हैसियत सबसे ऊपर मानी जाती है। उनके हिसाब से व्यक्ति की जिंदगी में ज्ञान, नैतिक दृष्टि और अच्छे संस्कार परिवार और गुरु के सधे हुए मार्गदर्शन से ही मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा उतनी ही जरूरी है जितनी कि युवाओं को भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़े रखना। साथ ही उन्होंने गीता भवन को ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का खास केंद्र कहा।
समारोह के दौरान ऐसे सरकारी विद्यालयों के प्राचार्य और शिक्षक भी मंच पर आए जिन्हें लगातार तीन वर्ष तक बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिशत परिणाम देने का रिकॉर्ड मिला। उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। मेरिट सूची में जगह बनाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को भी साथ में पुरस्कृत किया गया। मुख्यमंत्री ने माना कि ऐसे विद्यालय और शिक्षकों का सम्मान, शिक्षा के क्षेत्र में और बेहतर करने की प्रेरणा देता है। सरकार ने संकेत दिया कि भविष्य में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को प्रोत्साहन मिलता रहेगा।
मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि जो सरकारी विद्यालय लगातार तीन साल तक बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिशत परिणाम हासिल करेंगे, उन्हें राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस रकम को स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने, शैक्षणिक संसाधनों को और बेहतर बनाने और बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण माहौल तैयार करने में लगाया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों के बीच गुणवत्ता-आधारित प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना बताया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि जिन स्कूलों का प्रदर्शन उम्दा रहेगा उनके प्राचार्य और संस्था प्रमुखों को व्यक्तिगत तौर पर 1 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। उनका कहना था कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था के निर्माण में शिक्षकों के अलावा विद्यालय प्रमुखों की भूमिका भी बहुत अहम है। सम्मान मिलने से, शिक्षा तंत्र में सकारात्मक सोच और बेहतर परिणाम वाला माहौल बनने की उम्मीद जताई गई।
इसके बाद उन्होंने कहा कि प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 10 हजार नए शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। साथ ही ‘मिशन बुनियाद’ शुरू किया गया है, जिसके जरिए तकनीक-आधारित पढ़ाई को आगे बढ़ाया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 8 जिलों के 500 शासकीय स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित, आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का लक्ष्य बच्चों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार गीता भवन का निर्माण और शिक्षा विभाग में हुई नई घोषणाएं मध्य प्रदेश की शैक्षणिक और सांस्कृतिक पहचान को और ज्यादा मजबूत कर सकती हैं। शिक्षक भर्ती, आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण, विद्यालयों को प्रोत्साहन, और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण जैसे कदम शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक फर्क ला सकते हैं। आने वाले समय में इन योजनाओं का असर सही ढंग से लागू हुआ, तो विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को व्यापक फायदा मिलने की उम्मीद है।
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